ज़िन्दगी / सत्यम दुबे

तुममे सब कुछ है,
ये तुमने भी जाना है,
पर उसका असर कल भी रहेगा,
ये सबने माना है,
उम्र घट रही,
पेड़ से पत्तों की तरह,
पर उस पेड़ में नयी पत्तियाँ भी,
लगती है,
ये हमने जाना है |
पर इस जड़ पर शोध क्या करना,
जिसका इक अलग ही,
फ़साना है|
~सत्यम दुबे

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संघर्ष व गरीबी

#संघर्ष_ही_जीवन_है

#पर_इसकी_उम्र_कब_तक

#यदि_अन्तिम_साँस_तक

#तो_इस_संघर्

बड़ी शिद्दत के साथ,

अनंत से अनंत तारों को समेटता हूँ,

पर जब आँखे खुलती हैं

तो सारे के सारे जमीं पर बिखरे मिलते हैं;

बड़ा दुख होता है,

देख इन आसमाँ के तारों को

जमीं पर;

थकान, दर्द,

आँसू, काया,

हाड़ -मांस,

यहाँ तक कि रक्त का,

हर एक कण,

हार मानकर,

मुझसे कहता है कि,

बस करो,

रुक जाओ,

मुझसे नहीं होगा,

जहाँ पहुँचे हो,

यही तुम्हारा लक्ष्य है;

पर,

शाश्वत,

अविनाशी,

परब्रह्म,

परमात्मा,

अर्थात् “आत्मा”,

जो भार रहित है,

कहती है देख,

मेरे एक ऐसे स्वरूप को,

जो दूसरों को प्रकाशित करता है,

अर्थात् “सूर्य”;

इसी साहस के साथ,

मैं पुनः अपने पथ पर,

अग्रसर होता हूँ;

और बढ़ता चला जाता हूँ,

उस सूर्य की शक्ति से ही,

उस सूर्य की ओर;

नमन!

~सत्यम दुबे

 

तुम कैसा इतिहास चाहते नंगी जली चिताओं से?

क्या तुम दुविधाओं से पार चाहते नंगी जली चिताओं से?
यदि हाँ तो इस संहार का दुनिया बोध रखेगी

इस नाटक के उपसंहार करने को दुनिया बोध रखेगी

तुम शायद भूल गये हो मनमानी की इक सीमा होती है

उस सीमा को छू जाने को दुनिया बोध रखेगी

-सत्यम दुबे

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तुम कैसा इतिहास चाहते नंगी जली चिताओं से?
क्या तुम दुविधाओं से पार चाहते नंगी जली चिताओं से?
यदि हाँ तो इस संहार का दुनिया बोध रखेगी
इस नाटक के उपसंहार करने को दुनिया बोध रखेगी
तुम शायद भूल गये हो मनमानी की इक सीमा होती है
उस सीमा को छू जाने को दुनिया बोध रखेगी
-सत्यम दुबे https://twitter.com/er_satyam_dubey/status/981052587137880064?s=17